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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, गुरुतत्व की महिमा- श्रीनाभागोस्वामीजी ने श्रीभक्तमालजी में गुरु जी की परिभाषा सबसे पीछे किया। क्यों कि गुरु का अर्थ होता है भारी, वजनदार। गुरुतत्व वो तत्व है, जिसके सामने भगवान भी लघु हो जाय। श्रीशेषजी श्रीलक्ष्मणजी को गुरु तत्व कहा गया है।
नारायण शेष शैय्या पर पौढ़े रहते हैं। हमारे-आपके मन में हाथी के प्रति प्रेम जगे। तो उसे हम गोंद में नहीं उठा सकते। वो तो एक पैर रख देगा, उसी में राम-राम हो जायेंगे। हाथी की गोंद में लेने के लिये हाथी से अधिक भारी होना आवश्यक है।इसी तरह से भगवान को गोंद में उठाने के लिये भगवान से भारी होना आवश्यक है।
भगवान से भी ज्यादा वजनदार गुरुतत्व है। जिसकी गोंद में श्रीठाकुरजी खेलते रहते हैं, उसका नाम है गुरु तत्व। उन्हीं के बारे में संत श्रीकबीरजी ने कहा है कि-
सब घट मेरा सांईयां, खाली घट नहिं कोय।
बलिहारी वा संत की, जेहिं घट प्रगट होय।।
भगवान जिनके हृदय में प्रकट हो गये हैं, वही गुरु तत्व है। गुरु की परिभाषा श्रीप्रिया दास जी ने नहीं दी। क्योंकि शब्द छोटा पड़ रहा है। क्या कहें? बोले हम एक दृष्टांत अवश्य प्रस्तुत करेंगे। एक उदाहरण दिया। गुरु गुरुताई की सच्चाई लै दिखाई जहाँ, गाई श्री पयहारी जू की रीति रंग भरी है। श्रीकृष्ण दास पयहारी जी महाराज का दर्शन कर लो, तो गुरु की महिमा का पता लग जायेगा। पयहारी जी के शिष्य द्वाराचार्य हुए और सब सिद्ध हुये।
जाके सिर कर धरयो,तासु कर तर नहिं आड़यो।
अरप्यो पद निरवान शोक निर्भय करि छाड़यो।।
जिसके सिर पर हाथ रखा, उसके सामने हाथ नहीं फैलाया। जिनके मस्तक पर हाथ रखा, उसे भगवत प्राप्ति कराया।अंतर्धान होने के बाद भी शिष्य बनाया। एक द्वाराचार्य हुये श्री स्वामी हठी नारायण देवाचार्य। हठ कर लिया, पयहारी जी से ही दीक्षा लेंगे। गुफा में जाकर पड़ गये,पन्द्रह दिन तक कुछ नहीं खाया पिया। अन्त में पयहारी जी पधारे और बोले वो हठी मैं आ गया।
उनका नाम पड़ गया श्रीहठी नारायण दास। आगे चलकर हठी नारायण देवाचार्य रूप में प्रसिद्ध हुये। पयहारी जी ने शरीर नहीं छोड़ा, आज भी पयहारी जी विराजमान हैं। अधिकारी संतो को आज भी उनका दर्शन होता है। रघुवीर मंदिर वाले श्रीरणछोड़ दास जी महाराज को पयहारी जी ने दर्शन दिए। श्रीरणछोड़ दास जी महाराज श्रीपयहारीजी के प्रति गुरु भाव रखते थे।
अनेक संतों को पयहारी जी का दर्शन हुआ है। जैसे कई अमर संत होते हैं। पयहारी जी भी अमर संत हुये, आज भी हैं। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) श्री दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).