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Puskar/Rajasthan: परम पूज्य संत श्री दिव्य मोरारी बापू ने कहा, जिसे सबमें भगवान के दर्शन करने की कला सीखनी हो, उसे सबसे पहले मूर्ति में भगवान को देखने की आदत डालनी चाहिए। पीछे घर के लोगों में भगवान को देखना चाहिए और बाद में बाहर सर्वत्र भगवान को देखना चाहिए।
घर में रहकर भगवान की भक्ति करने की जिसमें इच्छा हो, उसे घर के हर एक जीव में भगवान के दर्शन करने की भावना रखनी होगी। इस तरह हर जीव में भगवान के दर्शन करने की कला नहीं आयेगी तो उससे व्यवहार में छल-कपट होगा। व्यवहार में पाप न हो, इसलिए घर के लोगों में भगवान को देखने की भावना रखो।
सत्य सनातन हिन्दु धर्म तो यहां तक कहता है कि द्वार पर आने वाले भिखारी में भी भगवान के दर्शन करो। भिखारी भीख मांगने नहीं आता। वह तो हम सबको ज्ञान देने आता है कि पूर्व जन्म में मैंने किसी को कुछ नहीं दिया, इसलिए मैं भिखारी हुआ हूँ । अब आप भी किसी को कुछ न देंगे तो अगले जन्म में मेरे जैसे भिखारी बनेंगे।
इस तरह द्वार पर आया हुआ भिखारी हमको समझने और सतर्क करने आता है,केवल भीख मांगने नहीं आता। प्रत्येक देह में भगवान बैठे हैं – ऐसा मानकर द्वार पर आने वाले में भगवान के दर्शन करो।
सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना, श्री दिव्य घनश्याम धाम, श्री गोवर्धन धाम कॉलोनी, बड़ी परिक्रमा मार्ग, दानघाटी, गोवर्धन, जिला-मथुरा, (उत्तर-प्रदेश) श्री दिव्य मोरारी बापू धाम सेवा ट्रस्ट, गनाहेड़ा, पुष्कर जिला-अजमेर (राजस्थान).