भारत में डील गतिविधियां 2025 की पहली तिमाही (जनवरी-मार्च अवधि) में तीन वर्ष के उच्चतम स्तर 27.5 अरब डॉलर पर रही हैं. इसमें पिछले वर्ष की समान तिमाही के मुकाबले 29.6% का उछाल देखने को मिला है. बुधवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है. एलएसईजी की रिपोर्ट में बताया गया कि इस वर्ष जनवरी से मार्च की अवधि में डील गतिविधियों में सालाना आधार पर 13.6% का उछाल देखने को मिला. इस कारण यह 2023 की पहली तिमाही के बाद अब तक की सबसे व्यस्त तिमाही रही है. एलएसईजी डील्स इंटेलिजेंस की वरिष्ठ प्रबंधक एलेन टैन ने कहा, यह वृद्धि मजबूत घरेलू डील गतिविधि और निजी इक्विटी समर्थित अधिग्रहणों में उछाल के कारण है.
इस वर्ष रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में हुई 5 में से 3 डील
वैल्यू के हिसाब से भारत के घरेलू सौदों में पावर और एनर्जी सेक्टर की हिस्सेदारी सबसे अधिक 32% रही. रिपोर्ट में बताया गया कि इस वर्ष 5 में से 3 डील रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में हुई है, जिनकी वैल्यू (विलय और अधिग्रहण मिलाकर) 4.9 अरब डॉलर रही है. टैन ने बताया कि भारत में पावर और एनर्जी, फाइनेंशियल, हेल्थकेयर, टेक्नोलॉजी, मटेरियल और मीडिया और एंटरटेनमेंट सहित विभिन्न क्षेत्रों में विलय और अधिग्रहण गतिविधियों में वृद्धि देखी गई. यह विस्तार वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारत की आर्थिक मजबूती को दिखाता है. रिपोर्ट में बताया गया कि बाजार में बढ़ती अस्थिरता, भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं ने आत्मविश्वास को कम कर दिया, जिससे वर्ष की शुरुआत में गतिविधि कम हो गई हैं.
वैश्विक आईपीओ बाजारों में एक प्रमुख खिलाड़ी बना रहा भारत
हालांकि, इन चुनौतियों के बावजूद, भारत वैश्विक आईपीओ बाजारों में एक प्रमुख खिलाड़ी बना रहा. रिपोर्ट में आगे बताया गया कि 2025 की पहली तिमाही के दौरान वैश्विक स्तर पर आईपीओ में भारतीय एक्सचेंजों की हिस्सेदारी 8.8% थी. वहीं, पहले नंबर पर मौजूद अमेरिकी बाजार की हिस्सेदारी 33.5% और दूसरे स्थान पर जापानी एक्सचेंजों की हिस्सेदारी 12.4% थी. यह भारतीय बाजारों की मजबूती को दर्शाता है. इसके अलावा, भारतीय कंपनियों की ओर से 2025 की पहली तिमाही में 28.8 अरब डॉलर के प्राइमरी बॉन्ड जारी किए गए हैं. इसमें पिछले वर्ष की समान तिमाही के मुकाबले 13.8% की वृद्धि हुई है.