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वित्त मंत्रालय द्वारा शनिवार को जारी नवीनतम आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में भारत के वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह में 10 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो 1.96 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. जुलाई 2017 में जीएसटी व्यवस्था लागू होने के बाद से यह सबसे अधिक मासिक संग्रह में से एक है. जीएसटी राजस्व में लगातार वृद्धि का श्रेय बेहतर अनुपालन, आर्थिक सुधार और विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ी हुई व्यावसायिक गतिविधियों को दिया जाता है.
मार्च 2025 में साल के अंत में कर भुगतान में भी उछाल देखा गया, जिसने राजस्व वृद्धि में और योगदान दिया. कुल संग्रह में से केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) 36,000 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) 46,000 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) 1.04 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसमें आयातित वस्तुओं से प्राप्त 49,000 करोड़ रुपये शामिल हैं. इसके अतिरिक्त, उपकर संग्रह 10,000 करोड़ रुपये रहा, जिसमें आयातित वस्तुओं से प्राप्त 900 करोड़ रुपये शामिल हैं.
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने लगातार वृद्धि की प्रवृत्ति पर संतोष व्यक्त किया और कहा कि वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए औसत मासिक सकल जीएसटी संग्रह लगभग 1.55 लाख करोड़ रुपये रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि कर संग्रह के प्रभावशाली आंकड़े मजबूत होती अर्थव्यवस्था और बेहतर कर प्रशासन को दर्शाते हैं. विश्लेषकों ने राजस्व रिसाव को रोकने के लिए ई-इनवॉइसिंग और डेटा एनालिटिक्स जैसे तकनीकी हस्तक्षेपों को भी श्रेय दिया है.
महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और गुजरात जैसे राज्यों ने जीएसटी राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिससे स्वस्थ आर्थिक गतिविधि प्रदर्शित हुई. नवीनतम आंकड़ों के आधार पर सरकार चालू वित्त वर्ष के लिए अपने राजस्व लक्ष्य हासिल करने के प्रति आशावादी है.