तीसरी तिमाही में 6.3 प्रतिशत तक बढ़ी भारत की जीडीपी वृद्धि दर, सरकारी खर्च से मिला संबल

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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भारत की अर्थव्यवस्था पिछले तिमाही में 6.3% की दर से बढ़ी है, जो सरकारी खर्च के कारण हुई है. यह वृद्धि उपभोक्ता मांग की कमजोरी को संतुलित करने में सफल रही. एक सर्वे के मुताबिक, आगामी समय में भारत की अर्थव्यवस्था में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि की संभावना है. भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि पिछले वित्तीय वर्ष के औसत 8.2% से घटकर जुलाई-सितंबर 2024 में 5.4% तक पहुंच गई थी. इस दौरान, सरकार ने चुनाव के कारण बुनियादी ढांचे पर खर्च में कटौती की थी. लेकिन अक्टूबर-दिसंबर 2024 में सरकारी खर्च में वृद्धि देखी गई, जो GDP में वृद्धि का प्रमुख कारण बना.
यह संकेत करता है कि अर्थव्यवस्था में सुधार सरकारी नीतियों से प्रेरित है, न कि व्यापक रूप से मजबूत आर्थिक गतिविधियों से. त्योहारों के दौरान आमतौर पर घरेलू खपत में वृद्धि होती है, लेकिन इस बार खपत अपेक्षाकृत मंद रही. विशेषज्ञों का मानना है कि अभी तक खपत अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने वाला प्रमुख कारक नहीं बन पाई है. भारतीय अर्थव्यवस्था में असमानता भी बढ़ी है, जिससे खपत की संभावनाएं सीमित हो रही हैं.
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, 2025 की चौथी तिमाही से अगले वित्तीय वर्ष की तीसरी तिमाही तक भारत की जीडीपी वृद्धि दर 6.3 से 6.7% के बीच रहने की संभावना है. हालांकि, यह दर 8% के लक्ष्य से कम है, जो उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार सृजन और व्यापक आर्थिक लाभ के लिए जरूरी मानी जाती है. सरकार ने निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कॉर्पोरेट करों में कटौती की है और बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाया है, लेकिन इससे अब तक रोजगार सृजन में कोई बड़ा उछाल नहीं आया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मांग में वास्तविक सुधार नहीं होगा, तब तक निवेश में भी कोई वृद्धि नहीं दिखाई देगी. दुनिया भर में आर्थिक असमानता बढ़ रही है, और भारत में सबसे धनी 1% की संपत्ति पिछले छह दशकों में सबसे अधिक बढ़ी है. इसके कारण कुल खपत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, जिससे साल दर साल मजबूत विकास की संभावना कम हो रही है. भारत की अर्थव्यवस्था को अगले कुछ वर्षों में मजबूत विकास की आवश्यकता है, लेकिन इसके लिए कृषि और श्रम बाजारों में बड़े सुधार की जरूरत होगी. इन सुधारों के बिना, देश को 8 प्रतिशत या उससे अधिक की वृद्धि दर तक पहुंचने में मुश्किलें आ सकती हैं.
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