भारत के ऑफिस लीजिंग बाजार ने 2024 में नया रिकॉर्ड बनाया. इस वर्ष कुल 81.7 मिलियन वर्ग फीट की लीजिंग हुई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 19 प्रतिशत अधिक है. IT/ITES सेक्टर ने सबसे ज्यादा 42 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ लीजिंग में बढ़त बनाई, जबकि 2023 में यह 28 प्रतिशत थी. CRE Matrix और CREDAI की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई ऑफिस लीजिंग में सबसे आगे रहे. इन शहरों ने कुल मांग का 62 प्रतिशत हिस्सा लिया और 20 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर्ज की.
2024 में 1 लाख वर्ग फीट से अधिक की लीजिंग डील्स में 41 प्रतिशत की हिस्सेदारी रही, जो 13 प्रतिशत अधिक थी. खासतौर पर बेंगलुरु और पुणे में बड़ी डील्स की मांग बढ़ी. रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में ऑफिस स्पेस की मांग आपूर्ति से अधिक रही. देशभर में खाली ऑफिस स्पेस की दर 17.7% से घटकर 15.7 प्रतिशत रह गई. दिल्ली-एनसीआर, मुंबई मेट्रो रीजन और चेन्नई में यह बदलाव अधिक दिखा. 2024 में को-वर्किंग ऑफिस लीजिंग 13 MSF रही, जो पिछले तीन सालों के औसत 10 MSF से 30 प्रतिशत अधिक है. दिल्ली-NCR में इस सेक्टर की मांग दोगुनी हो गई, जबकि बेंगलुरु में यह 1.4 गुना बढ़ी. भारत में औसत ऑफिस किराया 106 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गया, जो 13 प्रतिशत ज्यादा है.
खासतौर पर हैदराबाद, पुणे और मुंबई में यह वृद्धि देखी गई. 2024 में कुल 53 मिलियन वर्ग फीट नई ऑफिस स्पेस बनी, जो 2023 की तुलना में 19 प्रतिशत कम है. हालांकि, भारत में ग्रेड A ऑफिस स्टॉक 900 MSF के पार पहुंच गया. बेंगलुरु और हैदराबाद सबसे बड़े सप्लायर बने और कुल आपूर्ति में 55 प्रतिशत योगदान दिया. देशभर के सात प्रमुख माइक्रो-मार्केट (बेंगलुरु, मुंबई, दिल्ली-NCR, हैदराबाद, चेन्नई, कोलकाता और पुणे) में कुल 53.3 MSF की नई ऑफिस स्पेस जोड़ी गई.
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 2027 तक 295.7 MSF नई ग्रेड A ऑफिस स्पेस उपलब्ध होगी. 2024 में IT/ITES सेक्टर ने सबसे अधिक 42 प्रतिशत लीजिंग की, उसके बाद को-वर्किंग सेक्टर (16 प्रतिशत) और BFSI सेक्टर (12 प्रतिशत) रहे. ANAROCK ग्रुप के एमडी पियूष जैन के अनुसार, 2024 भारत के ऑफिस रियल एस्टेट मार्केट के लिए बदलाव का साल रहा. BFSI और को-वर्किंग कंपनियों की बढ़ती लीजिंग ने बाजार को मजबूती दी. उन्होंने कहा कि कंपनियां अब बेहतर गुणवत्ता वाली ऑफिस स्पेस की मांग कर रही हैं, जिससे डेवलपर्स को उन्नत सुविधाओं वाले प्रोजेक्ट विकसित करने पर ध्यान देना पड़ रहा है. इससे प्री-कमिटमेंट और फॉरवर्ड लीजिंग ट्रेंड में बढ़ोतरी हो रही है.