SC ने तेलंगाना CM के बयान पर जताई नाराजगी, जानिए क्‍या कहा ?

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
तेलंगाना में बीआरएस विधायकों को अयोग्य करार देने के मामले में दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ए जी मसीह की पीठ ने सीएम के बयान पर एक बार फिर नाराजगी जाहिर की है. कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा, क्या इससे पहले मुख्यमंत्री को अवमानना नोटिस जारी न करके हमने कोई भूल की है. इससे पहले मुख्यमंत्री बीआरएस नेता के कविता को जमानत दिए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी. इससे पहले सुनवाई के दौरान कोर्ट ने तेलंगाना विधानसभा के स्पीकर से पूछा था कि बीआरएस छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने वाले विधायकों की अयोग्यता के लिए याचिकाओं पर उन्होंने नोटिस जारी करने में 10 महीने क्यों लगाए.
अपने बयान में सीएम रेवंत रेड्डी ने कहा था कि अगर बीआरएस के विधायक कांग्रेस में शामिल होते है, तो भी उपचुनाव नहीं होंगे. जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस ए जी मसीह की बेंच ने कहा कि इस तरह का बयान संविधान के 10वें अनुसूची (दल बदल विरोधी कानून) का उपहास उड़ाने जैसा है. जस्टिस बीआर गवई ने आगे कहा कि रामलीला मैदान में कही गई बात सदन में कही गई बात से अलग है.
कोर्ट ने कहा कि जब राजनेता विधानसभा में कुछ कहते हैं, तो उसमें कुछ पवित्रता होती है. तेलंगाना सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए बयान पर टिप्पणी करने से जब इनकार कर दिया तो कोर्ट ने कहा कि मुख्यमंत्री को चेतावनी दें कि वो ऐसा बयान ना दें. याद दिलाया कि इससे पहले भी मुख्यमंत्री के लिए वो पेश हो चुके है. पिछली सुनवाई में जस्टिस बीआर गवई ने अयोग्यता याचिकाओं पर लंबित निर्णयों पर सवाल उठाया था.
सात विधायकों पर दलबदल का आरोप
कोर्ट ने पूछा था कि इन याचिकाओं को निपटने के लिए एक उचित समय सीमा क्या होनी चाहिए और क्या यह विधानसभा के कार्यकाल के अंत तक होना चाहिए. कोर्ट ने यह भी कहा था कि तब लोकतांत्रिक सिद्धांतों का क्या होगा? और कहा था कि हर मामले में परिणाम यह नही हो सकता कि ऑपरेशन सफल हो और मरीज मर जाए. कोर्ट ने यह टिप्पणी तब की जब याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि अयोग्यता पर विधानसभा अध्यक्ष याचिकाओं पर फैसला लेने में देरी कर रहे हैं. बीआरएस ने याचिका में अयोग्यता याचिकाओं पर तेलंगाना स्पीकर को जल्द फैसला लेने का निर्देश देने की मांग की गई है. जिन 7 विधायकों पर दलबदल का आरोप लगा है उनमें श्रीनिवास रेड्डी परिगी, बंदला कृष्ण मोहन रेड्डी, काले यादैया, टी. प्रकाश गौड़, ए. गांधी, गुडेम महिपाल रेड्डी और एम. संजय कुमार शामिल है.
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