CM योगी ने गुरु गोरक्षनाथ ज्ञानस्थली का किया उद्घाटन, कहा- यह पावन धरा दुनिया को करुणा और मैत्री का देती है संदेश

Shivam
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 04 अप्रैल यानी शुक्रवार को सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गुरु गोरक्षनाथ ज्ञानस्थली का उद्घाटन किया. इस दौरान उन्होंने कहा, यह पावन धरा दुनिया को करुणा और मैत्री का संदेश देती है. इतिहास साक्षी है कि भारत ने कभी तलवार के बल पर शासन नहीं किया. मुख्यमंत्री ने कहा कि आज वासंती नवरात्र की सप्तमी तिथि है, जो महाकाली को समर्पित है. सनातन परंपरा ‘तमसो मा ज्योतिर्गमय’ के सूत्र से शुरू होती है.

गुरु गोरक्षनाथ ज्ञानस्थली के उद्घाटन पर सभी को दी बधाई

उन्होंने गुरु गोरक्षनाथ ज्ञानस्थली के उद्घाटन पर सभी को बधाई देते हुए कहा कि भारत की परंपरा ने हमेशा ज्ञान की आराधना की है. ‘आनो भद्रा क्रतवो यन्तु विश्वतः’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि चारों ओर से आने वाली ज्ञान की धारा को ग्रहण करना प्रगति का मार्ग प्रशस्त करता है. समाज के प्रबुद्ध वर्ग और सज्जन शक्ति को इसके लिए हमेशा तत्पर रहना चाहिए. सीएम योगी ने कहा कि कई वर्षों बाद उन्हें यहां आने का अवसर मिला है.
2008 के समय को याद करते हुए उन्होंने कहा कि तब यहां अराजकता और असुरक्षा का माहौल था. बेटियां और व्यापारी असुरक्षित थे और तत्कालीन सरकारों के एजेंडे में विकास और शिक्षा की कोई जगह नहीं थी. लेकिन पिछले 10 वर्षों में भारत में व्यापक बदलाव आया है. पहले भारत के सामने पहचान का संकट था, लेकिन आज यह ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के रूप में उभरा है. उन्होंने कहा कि भारत अब दुनिया का पिछलग्गू नहीं, बल्कि 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और जल्द ही तीसरी आर्थिक महाशक्ति बनेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह नया भारत अपनी ताकत और सौहार्द का अहसास करा रहा है. भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया है कि वह बल, बुद्धि और वैभव में कितना भी मजबूत हो, मगर जबरन किसी पर न तो आधिपत्य स्थापित करेगा ना ही किसी का आधिपत्य स्वीकार करेगा.
सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि देश हर क्षेत्र में परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है. विरासत और विकास का बेहतर समन्वय ही कल्याणकारी जीवन की कुंजी है. अयोध्या में 500 साल की दासता की बेड़ियां टूटने और राम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर के निर्माण का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जब देश अपनी विरासत पर गर्व करता है, तो महाकुम्भ में 66 करोड़ से अधिक श्रद्धालु सनातन धर्म के सामर्थ्य को दुनिया के सामने प्रस्तुत करते हैं.
सीएम योगी ने भारतीय परंपरा की शांतिपूर्ण प्रकृति पर विशेष जोर डालते हुए कहा कि इतिहास साक्षी है कि भारत ने कभी तलवार के बल पर शासन नहीं किया. भगवान राम ने माता सीता को खोजते हुए लंका पर विजय प्राप्त की, लेकिन वहां का राज्य विभीषण को सौंप दिया. उन्होंने कहा था कि लंका कितनी भी स्वर्णमयी हो, लेकिन जन्मभूमि और जननी से बढ़कर कुछ नहीं. इसी तरह किष्किंधा में श्रीराम ने बाली का वध कर सुग्रीव का राज्याभिषेक किया और दंडकारण्य में ऋषियों को सुख प्रदान किया. सीएम योगी ने सिद्धार्थनगर के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि राजकुमार सिद्धार्थ का बचपन यहीं बीता था. ज्ञान प्राप्त करने के बाद वे गौतम बुद्ध कहलाए. बौद्ध धर्म ने करुणा और मैत्री के बल पर दुनिया को आकर्षित किया, न कि तलवार के दम पर.
मुख्यमंत्री ने 2014 से पहले के समय को याद करते हुए कहा कि तब कुछ लोग राम और कृष्ण को मिथक बताते थे और भारतीय परंपरा को अपमानित करना अपना अधिकार समझते थे. लेकिन 2014 के बाद पीएम मोदी के नेतृत्व में देश ने अपनी विरासत और विकास के समन्वय से नई ऊंचाइयों को छुआ है. काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज जैसे धार्मिक स्थलों का कायाकल्प इसका प्रमाण है.
सीएम योगी ने कहा कि भारत की ज्ञान परंपरा को समझने के लिए वेदों और उपनिषदों को देखना होगा. आधुनिक विज्ञान जहां नहीं पहुंच सका है, उसका भी मार्गदर्शन उपनिषद कर सकते हैं. सीएम योगी ने बताया कि आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मातृभाषा में शिक्षा शुरू हुई है, जिससे मेडिकल, इंजीनियरिंग और मानविकी के क्षेत्र में प्रगति हो रही है. उन्होंने 18 अटल आवासीय विद्यालयों, 57 जनपदों में मुख्यमंत्री कम्पोजिट विद्यालयों और कस्तूरबा विद्यालयों के उन्नयन का विशेष रूप से जिक्र किया.

गुरु गोरक्षनाथ ज्ञानस्थली पूरे क्षेत्र को करेगा आलोकित

मुख्यमंत्री ने कहा कि गुरु गोरक्षनाथ ज्ञानस्थली का पहला सत्र शुरू हो चुका है, जिसमें अबतक 150 छात्रों ने पंजीकरण कराया है. उन्होंने विश्वास जताया कि नवरात्र के इस पावन अवसर पर शुरू हुआ यह केंद्र एक बड़े शिक्षण संस्थान के रूप में क्षेत्र को आलोकित करेगा. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीयता, संस्कार और मातृभूमि की परंपराओं से शिक्षा को जुड़ना होगा.
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर कविता शाह, जिला पंचायत अध्यक्ष शीतल सिंह, पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ विधायक जय प्रताप सिंह, श्यामधनी राही, विनय वर्मा, पूर्व मंत्री सतीश द्विवेदी, गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश शुक्ला, गुरु गोरखनाथ ज्ञानस्थली के अध्यक्ष और पूर्व विधायक राघवेन्द्र प्रताप सिंह, निदेशक प्रवीण पांडेय, प्रदीप सिंह, आकाश सिंह, भाजपा जिलाध्यक्ष कन्हैया पासवान, जिला प्रभारी हरिचरण कुशवाहा सहित अन्य गणमान्य मौजूद रहे.
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