चीन और EU के बीच बड़ा समझौता, ईवी टैरिफ होगा खत्म! पश्चिमी देशों की बढ़ी टेंशन

Raginee Rai
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

China-EU: चीन और यूरोपीय संघ (EU) के बीच एक बड़ा समझौता होने जा रहा है. यूरोपीय संघ चीन से यूरोप आयात किए जाने वाले चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) से टैरिफ हटाने वाला है. यूरोपीय संसद की इंटरनेशनल ट्रेड कमेटी के अध्यक्ष बर्न्ड लैंग ने शुक्रवार को ऐलान किया कि दोनों पक्ष बातचीत के अंतिम दौर में हैं. बर्न्ड लैंग ने संकेत दिए कि जल्द ही दोनों पक्ष एक निर्णय पर पहुंच सकते हैं, जिससे चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैक्स माफ किया जा सकता है. इस घोषणा ने पश्चिमी देशों की EV कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि चीन की ईवी उनसे काफी सस्ती हैं. टैरिफ हटने से इनके दामों में और भी कमी आ जाएगी.

चीन और ईयू के बीच टैरिफ सौदा

बर्न्ड लैंग ने बताया कि यूरोपीय यूनियन और चीन अपने इलेक्ट्रिक वाहनों पर टैरिफ को खत्म करने के लिए लगभग तैयार हैं. उन्होंने कहा कि चीन यूरोप में ईवी को सस्‍ती कीमतों पर बेचने के लिए प्रतिबद्ध है और किसी भी अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचना चाहता है. यह डील चीन की ओर से अपने इलेक्ट्रिक व्हीकल प्रोड्यूसर को दी जाने वाली सब्सिडी पर चिंताओं का समाधान करने में मदद करेगा.

यूरोपीय संघ ने दावा किया है कि ये सब्सिडी चीनी कंपनियों को यूरोप में सस्‍ते दाम पर इलेक्ट्रिक वाहन बेचने में मदद करती है, जिससे यूरोपीय कार निर्माताओं के लिए प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाता है. जानकारी दें कि शुरुआत में EU ने यूरोप की कंपनियों को इस कॉम्पिटिशन से बचाने के लिए चीनी ईवी पर टैरिफ लगाया था.

पहले यूरोपीय संघ और चीन में बढ़ गया था तनाव

पिछले साल अक्टूबर में यूरोपीय संघ ने चीन से आने वाले ईवी पर 35.3प्रतिशत तक का अतिरिक्त शुल्क लगाया था. ईयू ने जब कहा था कि चीनी सब्सिडी की चलते यूरोपीय निर्माता अपने व्हीकल नहीं बेच पा रहे हैं. यूरोपीय आयोग को डर था कि चीनी EV आयात में इजाफा से यूरोपीय ऑटोमोटिव क्षेत्र में स्थानीय व्यवसायों और नौकरियों को नुकसान हो सकता है. चीन ने भी इस फैसले को हल्के में नहीं लिया था, जिसके बाद से दोनों में तनाव आ गया था. हालांकि अब नई बातचीत में उम्मीद की जा रही है कि यूरोपीय संघ और चीन के रिश्तों में सुधार हो सकता है.

दरअसल, ईयू और चीन के बीच व्यापारिक संबंधों में एक नाजुक संतुलन बना हुआ है. दोनों पक्ष अपने उद्योगों की रक्षा करने की कोशिश के साथ ही एक बड़े ट्रेड वॉर से बचने की कोशिश में लगे हैं. अगर यह डील होती है तो यह इन तनावों को कम करने और ईवी मार्केट में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करने में मदद कर सकता है.

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