China: कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी का इलाज काफी महंगा और लंबा होता है. लेकिन अब इस बीमारी का महज 11 हजार रुपये में हो सकता है. चीनी वैज्ञानिकों ने कैंसर के इलाज के लिए एक नई थेरेपी बनाई है. इस तकनीक को ‘ऑन्कोलाइटिक वायरस थेरेपी’ कहा जाता है. यह तकनीक न केवल कैंसर के खतरनाक ट्यूमर को खत्म करने में सक्षम है, बल्कि शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को भी सक्रिय कर सकती है.
क्या है ऑन्कोलाइटिक वायरस थेरेपी?
ऑन्कोलाइटिक वायरस को एक छिपे हुए हत्यारे के रूप में देखा जा सकता है. वैज्ञानिकों ने इन वायरस को इस तरह से डेवलप किया है कि वे सीधे कैंसर कोशिकाओं में प्रवेश करें, वहां अपनी संख्या बढ़ाएं और अंततः कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर दें. इसके अलावा, ये वायरस ऐसे प्रोटीन भी छोड़ सकते हैं जो शरीर की प्रतिरोधक प्रणाली को बाकी बची हुई कैंसर कोशिकाओं को खत्म करते हैं.
कुछ ही देशों के पास है ये तकनीक
यह तकनीक कोई नई नहीं है. ऑन्कोलाइटिक वायरस पर शोध लगभग 100 साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन हाल के वर्षों में जेनेटिक इंजीनियरिंग की चलते इसकी क्षमता में जबरदस्त सुधार हुआ है. अब तक, अमेरिका और जापान सहित दुनिया के कुछ देशों में इस तकनीक को अपनाया गया है, लेकिन चीन इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. वहां करीब 60 क्लीनिकल ट्रायल चल रहे हैं, जिनसे उम्मीद की जा रही है कि यह इलाज आम लोगों के लिए सुलभ और सस्ता हो सकेगा.
चमत्कारी नतीजे दिखा रही यह थेरेपी
इस साल जनवरी में प्रकाशित एक शोध में 58 साल की महिला की कहानी सामने आई, जिसे सर्वाइकल कैंसर था और सभी पारंपरिक इलाजों का उस पर कोई असर ही नहीं था. उसे ऑन्कोलाइटिक वायरस थेरेपी दी गई, जिसका नतीजा यह हुआ कि उसके मेटास्टैटिक ट्यूमर पूरी तरह से खत्म हो गए. हैरानी की बात यह है कि इस थेरेपी के बाद महिला 36 महीने तक जीवित रही.
दक्षिण चीन के ग्वांग्शी मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर झाओ योंगशियांग के नेतृत्व में यह शोध किया गया था. वैज्ञानिकों ने एक ऐसे वायरस का इस्तेमाल किया जिसने कैंसर कोशिकाओं को सुअर के ऊतक जैसा बना दिया, जिससे शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ने उन्हें बाहरी तत्व मानकर नष्ट कर दिया. इस छोटी ट्रायल में यह भी देखा गया कि 90 प्रतिशत मरीजों (जिन्हें लिवर, ओवेरियन और लंग कैंसर था) में ट्यूमर का आकार घट गया या स्थिर हो गया.
केवल 11 हजार में इलाज
खास बात ये हैं कि ऑन्कोलाइटिक वायरस थेरेपी की लागत बेहद कम है. कैंसर के इलाज में अब तक इस्तेमाल की जाने वाली CAR-T थेरेपी की कीमत चीन में करीब 1.16 करोड़ रुपये (140,000 अमेरिकी डॉलर) प्रति डोज होती है. इसके तुलना में, ऑन्कोलाइटिक वायरस थेरेपी का एक इंजेक्शन महज 11 हजार रुपये (140 अमेरिकी डॉलर) में उपलब्ध हो सकता है, सालभर की इस थेरेपी की कुल लागत 3.3 लाख रुपये (4,200 अमेरिकी डॉलर) तक हो सकती है, जो मौजूदा कैंसर उपचार की मुकाबले काफी किफायती है.
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