China Politburo: ताइवान के साथ बढ़ते तनाव के बीच चीन के आंतरिक सिस्टम में बड़ा फेरबदल हुआ है. चीन की सबसे बड़ी संस्था पोलित ब्यूरो में 2 बड़े नेताओं की जिम्मेदारियों को बदल दिया गया है. यह कार्रवाई राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कहने पर किया गया है. चीन में ऐसा पहली बार हुआ है जब पोलित ब्यूरो में बदलाव किया गया है.
द साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, चीन के पोलित ब्यूरो में 2 बड़े बदलाव किए गए हैं. बदलाव के तहत ली गंजी को संयुक्त मोर्चा की कमान सौंपी गई है. वहीं शी ताइफेंग को संगठन का प्रमुख बनाया गया है. ताइफेंग पहले संयुक्त मोर्चा प्रमुख के पद पर काबिज थे. पोलित ब्यूरो में यह परिवर्तन जिनपिंग ने हाईलेवल मीटिंग के बाद लिया.
बदलाव क्यों अहम है?
चीन में संयुक्त मोर्चे का काम गैर-चीनी लोगों का प्रबंधन करना है, जिनमें ताइवान और तिब्बत शामिल है. ली को संघर्ष के बीच यह बड़ी जिम्मेदारी दी गई है. ताइवान और चीन के बीच पिछले कुछ माह से तनाव बहुत ज्यादा बढ़ गया है. ताइवान के खिलाफ चीन ने मजबूत घेराबंदी कर दी है, लेकिन चीन जानता है कि ताइवान से युद्ध लड़ना आसान नहीं है. यही वजह है कि चीन ने बीच संघर्ष में ताइवान से जुड़े संयुक्त मोर्चा के प्रमुख को बदल दिया है.
शी ताइफेंग पर उदासीन ढंग से काम करने का भी आरोप है. हाल ही में ताइवान ने चीन के 5 महिलाओं को अपने देश से वापस भेज दिया, जिसके वजह से चीन की काफी किरकिरी हुई. बता दें कि चीन में पोलित ब्यूरो को सर्वोच्च इकाई माना जाता है, जिसके राष्ट्रपति शी जिनपिंग प्रमुख हैं. पोलित ब्यूरो में 24 मेंबर होते हैं, जो चीन के सभी बड़े फैसले लेते हैं.
ताइवान के आसपास चीन की मजबूत घेराबंदी
जानकारी के अनुसार, चीन ने ताइवान को घेरने के लिए 100 से अधिक एयरक्राफ्ट उतारे हैं. चीन ने जिन हथियारों की तैनाती की है, उनमें वाईजे-21 बैलास्टिक मिसाइल और एच-के बॉम्बर शामिल है. बीजिंग का कहना है कि ताइवान के राष्ट्रपति पैरासाइट हैं. इन्हें सबक सिखाने की आवश्यकता है. दोनों देशों के बीच तनाव को मुख्य मुद्दा यह है कि चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र द्वीप बताता है.
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