China Taiwan conflict: ताइवान को लेकर एक बार फिर से चीन ने सख्त रवैया अपनाया है. चीन ने दुनिया के सामने चेतावनी देते हुए कहा कि ताइवान की आजादी का मतलब सिर्फ जंग है. चीन का यह भी कहना है कि ताइवान में किसी भी विदेशी का हस्तक्षेप को वह बर्दाश्त नहीं करेगा. अगर कोई भी हस्तक्षेप होता है तो चीन इसके खिलाफ कार्रवाई करेगा.
इस प्रकरण को लेकर चीनी सेना के प्रवक्ता कर्नल वू कियान का कहना है कि यूनिफिकेशन ऑफ चाइना इतिहास की ऐसी घटना है, जिसका होना निश्चित है, इसे टाला नहीं जा सकता.
चीन ने क्यों किया विरोध
आपको बता दें कि 20 मई को ताइवान में नए राष्ट्रपति ने पदभार ग्रहण किया है. अपने शपथ के बाद उन्होंने ताइवान की आजादी की बात कही. उनके बयान पर चीनी सेना के प्रवक्ता ने रिएक्ट किया. वहीं, राष्ट्रपति के बयान को लेकर यूनिफिकेशन ऑफ चाइना की बात कही.
आपको जानना चाहिए ताइवान के पूर्व राष्ट्रपति साई इंग वेन की जगह लाई चिंग ते ने ली है. जनवरी में ताइवान के चुनाव हुए थे, ताइवान की आजादी की समर्थक डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी ने सत्ता हासिल की थी.
क्या है चीन का कहना
दरअसल, चीन ताइवान के यूनिफिकेशन को लेकर अड़ा है. यूनिफिकेशन का मतलब एकीकरण है. वहीं, ताइवान की सत्ताधारी पार्टी डीपीपी का ने कहा कि ताइवान एक संप्रभु राष्ट्र है. ताइवान के राष्ट्रपति लाई ने कहा कि चीन ताइवान को धमकाना बंद करे. चीन को मिलकर शांति के साथ बात करने की बात कही है.
ताइवान अपने लिए खतरा पैदा कर रहा है: चीन
आपको बता दें कि चीनी सेना के प्रमुख कर्नल वू का कहना है कि राष्ट्रपति का भाषण विदेशी ताकतों की मदद से ताइवान की आजादी को स्वीकार करना है. चीन ने चेतावनी देते हुए कहा कि चीन ऐसी किसी भी हरकत का सख्ती से जवाब देने के लिए तैयार है. आजादी की मांग ताइवान के लिए बड़ा खतरा है. मीडिया रिपोर्ट्स से मिली जानकारी के अनुसार चीन की सेना द्वारा ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग ते के शपथ ग्रहण के तीन दिन के बाद ही युद्धाभ्यास किया गया था.
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