Markandey Mahadev Mandir: भगवान शिव का वह स्थान, जहां जंजीरों में बंधे हैं यमराज, जानिए वजह

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Markandeyeshwar Mahadev Mandir In Ujjain: सावन के पावन महीने की शुरुआत होते ही महाकाल की नगरी उज्जैन में भक्तों की भारी भीड़ लगनी शुरू हो गई है. यहां देश के कौने-कौने से श्रद्धालु भगवान शिव के जलाभिषेक पूजन के लिए आ रहे हैं. बाबा महाकाल की नगरी में महालेश्वर मंदिर के अलावा और भी कई ऐसे धार्मिक मंदिर हैं, जो अपने चमत्कारों के कारण जानें जाते हैं. ऐसे में आज हम आपको अवंतिका नगरी उज्जैन में स्थिति भगवान शंकर के ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे हैं, जहां भगवान शिव ने यमराज को जंजीरों से बांध कर रखा है.

दरअसल, हम बात कर रहे हैं धार्मिक नगरी में स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर की. 5000 साल पुराने इस मंदिर को सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल का माना जाता है. जहां मार्कण्डेश्वर ऋषि ने काल को परास्त कर मृत्यु पर विजय प्राप्त की थी और चिरंजीवी हो गए थे. इस मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि यहां मार्कण्डेश्वर महादेव की पूजा अर्चना करने से भक्तों को आयु आरोग्य की प्राप्ति होती है.

जानिए पौराणिक महत्व
पौराणिक मान्यतानुसार ” ऋषि मृकंड ने भगवान ब्रह्मा की तपस्या कर पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त किया था, लेकिन उनके पुत्र मार्कण्डेय की आयु अल्प थी. जिसके कारण ऋषि मृकंड पुत्र ऋषि मार्कण्डेय की अल्प आयु को लेकर चिंतित रहने लगे. पिता को चिंतित देखकर पुत्र परेशान था. एक दिन पुत्र के निवेदन पर मुनि ने उसे सारा वृतांत बताया. इसके बाद मार्कण्डेय ने अपने पिता का दुख दूर करने और दीर्घ आयु प्राप्त करने की कामना से अवंतिका तीर्थ स्थित महाकाल वन में मौजूद इसी मंदिर मे भगवान शंकर की कठोर तपस्या की. जब वो 12 वर्ष के हुए और उन्हें यमराज अपने साथ लेने के लिए आए तो ऋषि मार्कण्डेय ने भगवान शिव की प्रतिमा को दोनों हाथों से पकड़ लिया था.”

ऐसा कहा जाता है कि जब मार्कण्डेय के प्राण लेने के लिये यमराज आगे बढ़े, तभी वहां भगवान शिव प्रकट हुए और मृत्यु के देवता यमराज को जंजीरों में बांध दिया. साथ ही ऋषि मार्कण्डेय को 12 कल्प के आयु का वरदान दिया था. इस स्थान पर मार्कंडेय महादेव का मंदिर स्थित है. मंदिर के बारे में ऐसी मान्यता है कि यहां आज भी भगवान शिव यमराज को बांधकर रखे हुए हैं. शिवभक्त इस मंदिर मे विशेष पूजा अर्चना करके अपनी लंबी आयु और आरोग्यता की कामना करते हैं.

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(Disclamer: इस लेख में दी गई जानकारी पौराणि मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. The Printlines इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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